मैं हिंदू और मेरी बस सहेली मुसलमान थी।

मैं हैरान थी ,क्योंकि अब तक समाज की हकीकत से अनजान थी । आज पहली बार एहसास हुआ, कि मैं हिंदू और मेरी वह सहेली मुसलमान थी।  जिसके डिब्बे से कई बार खाना तो मैंने भी खाया था,जिसके साथ स्कूल का हर पल हर लम्हा बताया था । जिसने दिवाली पर मुझे ढेरों शुभकामनाएं भी दीContinue reading “मैं हिंदू और मेरी बस सहेली मुसलमान थी।”

साहस करना होगा

माफ करना आपकी गुड़िया को,बापू अब साहस करना होगा।जो अब मौन रही तो मुझको जीवन भर,यहां घुट-घुट के मरना होगा। हाँ, याद है मम्मी ने बातेंसहन करनी सिखलाया था।अपना घर है ,ये याद रख कड़वेघूट भरना बतलाया था। पर बस एक प्रश्न करती हूं उनसे,क्या वह खुश रह पाई थी?जब-जब केवल आपके लिए उन्होंने चोट,अपनेContinue reading “साहस करना होगा”

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